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Thursday, 1 December 2011

कुछ यूं लिखूं

इक कलम था इक थी दुआ
और शब्द थे कुछ पुष्प से
बांधा उन्हें फिर सोच कर
तो बन गयी आराधना
हे हंसवाहिनी अर्पण तुझे
इस भक्त की ये साधना
करलो इसे स्वीकार
और देदो मुझे कुछ ज्ञान अब
कि लिख सकूं इस देश पर
इस देश की सच्चाई पर
बस दे मुझे कुछ ताकतें
मेरी कलम और मेरी सोच में
लिख दूं नयी इक दास्तान
बदले जो हर इक सोच को
पढ़ कर जिसे बस सब कहें
क़ी अमल कर बस अमल कर

मन में तो है कुछ यूं लिखूं
इश्वर लिखूं
अल्लाह लिखूं
गोविन्द लिखूं
जीसस लिखूं
हर शख्श की पहचान हो
तोडूँ सभी ये सरहदें
हम एक थे और एक हैं
बाटों न अब जज़्बात से
जब रूह सबकी एक है
जागो सभी उठ कर चलो
मिल कर चलो बढ़ते चलो
न कोई दुश्मन उठ सके
जो सरहदें पैदा करे

आओ तो ये सौगंध लें
समझेंगे ताकत कलम की
फिर मिलके सब ऐसा लिखें
कि लब हिलें तो बस कहें
कि अमल कर बस अमल कर
बस अमल कर बस अमल कर.......

(कौशल किशोर) कनपुर

8 comments:

  1. कलम की ताकत बहुत बड़ी ताकत है हम सभी इस बात से वाकिफ हैं.....इक वाकया बचपन में सुना था की एक बार विवेकानंद जी ने कोई निबंध लेखन में हिस्सा लिया और केवल एक पंक्ति में ही निबंध समाप्त कर दिया और पहला पुरूस्कार भी मिला तो उस एक लाइन में क्या लिख दिया होगा.... ये सोंचने वाली बात है.
    कलम की ताकत को कुछ अपने तरीके से लिखने की कोशिश की है.... और आप सभी के कमेंट्स के लिए तैयार हूँ.

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  2. हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये बधाई के साथ शुभकामनायें ।

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  3. आपको लोहड़ी हार्दिक शुभ कामनाएँ।
    ----------------------------
    कल 13/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. एक अच्छे भाव की सफल प्रस्तुति - सुन्दर
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
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  5. कलम की ताकत को कहती अच्छी प्रस्तुति

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  6. kalam men vo taqat hai jo talwaar men nahi .
    bahut khubsurat bhaav .

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