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Wednesday, 7 December 2011

तमाशाबीन तो नहीं

आये दिन हम न्यूज़पपेर्स में छेड़छाड़ किस्से पढ़ते रहते हैं शायद हम सभी को शर्मिंदगी होती है और डरते हैं कि कहीं.... मैंने इस बारे में कुछ लोगों से बात की और कुछ पंक्तियाँ तैयार की जो आप से बांटना चाहता हूँ.

मत देख ऐसे मैं तमाशाबीन तो नहीं
खुबसूरत हूँ पर घूरने की चीज़ तो नहीं
घर से निकलते ही डर लगता है
पर किस किस से डरूं ये मालूम ही नहीं
मिला जो खुदा तो पूंछना ये है
कि खूबसूरती सबकी एक सी क्यूँ नहीं
जब दिल भी सबका एक सा
तो रंग रूप और सोच एक सी क्यों नहीं
तालीम दी रोशन किया
पर इनको नफ्स पे काबू क्यूँ नहीं
पहचान खो जाये
ये सोच के घर से निकलना है
सारी बंदिशें तोड़ के आंगे बढ़ना है
तू कर या कर
पर इस सोंच को बदलना है
कि हम तमाशबीन ही नहीं.

5 comments:

  1. intresting ....http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  2. badhiya wa manmohak prastuti

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  3. khubsurat hone par bhi dar lagata hai..
    nayi si bat lagi apki is rachana me

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