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Thursday, 24 November 2011

तू भी कल प्यार में हो

मत उठा मेरे प्यार पे ऊँगली ऐ शाहिद 
मत करा  दूर दो रूंहों को अलग ऐ शाहिद 
हम भी अल्लाह के बन्दे हैं कुछ तो डर ऐ शाहिद 
कहीं ऐसा न हो कि, तू भी कल प्यार में हो और बन जाऊं मैं शाहिद

2 comments:

  1. MUBARAK HO.. APKI PAHLI POST.. KHUB NAAM KAMAO BLOG KI DUNIYA MEN...

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